कर्पूरी ठाकुर जी और उनके वारिस


#समस्तीपुर #बिहार जननायक कर्पूरी ठाकुर की 92वीं जयंती रविवार को पूरे राजकीय समारोह के साथ समस्तीपुर में मनाया गया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जननायक कर्पूरी ठाकुर के पैतृक गांव पितौझिया कर्पूरी ग्राम पहुंचे. मुख्यमंत्री ने कहा की जननायक कर्पूरी ठाकुर समाजवादी नेता थे आज सभी उन्हीं के बताये रास्ते पर चलते हुए उनके आदर्शो को अपनाते हुए बिहार में न्याय के साथ विकास कर रहे है. बिहार के प्रमुख नेताओं- लालू प्रसाद यादव, राम विलास पासवान और नीतीश कुमार उन्हें अपना आदर्श मानते हैं।

24 जनवरी को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर की 92वीं जयंती मनाने के लिए बिहार की राजनीति में होड़ लगी हुई है. जनता दल यूनाइटेड-राजद गठबंधन और भारतीय जनता पार्टी, दोनों ही खेमे कर्पूरी जयंती को बड़े पैमाने पर मनाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं. कर्पूरी ठाकुर की राजनीतिक विरासत पर दावेदारी के बारे में उनके बेटे और जनता दल यूनाइटेड से राज्यसभा के सदस्य रामनाथ ठाकुर की अपनी राय है. वो कहते हैं, “कर्पूरी ठाकुर हमेशा जनता की मांग पर ध्यान देने वाले नेता रहे।”

Continue reading “कर्पूरी ठाकुर जी और उनके वारिस”

सामाजिक समरसता


अगर आज का भारत गाँधी जी जहाँ कही होंगे अगर देख रहे होंगे तो यह सोच के रो रहे होंगे क्या मैंने इसी भारत की तस्वीर देखी थी। अगर यही होना था तो क्यों ना अखंड भारत का सपना देखा।

दादरी उत्तर प्रदेश, मालदा पश्चिम बंगाल, पूर्णिया बिहार, फतेहपुर उत्तर प्रदेश, हरदा मध्य प्रदेश में अगर होने वाली घटनाओं का विश्लेषण किया जाये तो पता चलता है हम कितने असहिष्णु हो गए है। कहा गयी वो सामाजिक समरसता जब हमें अपने बचपन में कभी यह पता नहीं चला की हम कहाँ है और किसके साथ है। कभी हमारी माओं ने ये चिंता नहीं की, शाम हो गयी है मेरा बेटा कहाँ है और खाया या नहीं। लेकिन आज माओं को इस चिंता के बजाये इस बात की चिंता होती है की क्या हुआ होगा वो सही सलामत तो होगा, क्यों क्योंकि आज हमे अपने पड़ोसियों तक पर भरोसा नहीं रहा। क्योंकि हमारी वो जो आपस की एक अनजान डोरी हुआ करती थी जो हमे आपस में एक दूसरे से बांधे रखती थी वो कही टूटती सी नजर आती है। लेकिन मैं कहूँगा नहीं, ये हमारी सामाजिक समरसता आज भी है जो एक हिन्दू बेटी की शादी में एक मुस्लिम परिवार का कोई युवा अपना योगदान देता नजर आता है और कोई मुस्लिम परिवार की बेटी की शादी में हिन्दू युवा अपना योगदान देता नजर आता है। तो आखिर ऐसा क्यों है की वह अनजान धागा टूटता नजर आता है। ये सिर्फ और सिर्फ हमारे राजनितिक आकाओं की उपज है। क्यों, क्योंकि वे ये नहीं चाहते है की हम एक रहे क्योंकि इससे उनकी दूकान बंद होने का खतरा है।

Continue reading “सामाजिक समरसता”