JNU के माननीय सदस्यों से अपील


StandWithJNU कुछ लोग इस शब्द को लगता है फैशन स्टेटमेंट की तरह लेने लगे है, वैसे ही जैसे कुछ पत्रकार यह कहने लगे है मैं देशद्रोही हूँ। ऐसे शब्दों का चुनाव करने वालो को देखकर ऐसा लगता है जैसे एक ऐसे मुद्दे को भटकाने की कोशिश में लगे है जो वाकई में एक सभ्य समाज के लिए खतरनाक है। अंग्रेजी में पढ़ने और लिखने वाले अपने को छोड़कर किसी और की बुद्धिमत्ता को कमतर आंकते है या उन्हें किसी खास एक पार्टी के विचारधारा से मिलाकर देखते है।

JNU को भारत में सर्वश्रेष्ठ भारत के विद्यार्थियों ने बनाया और इसमें किसी एक व्यक्ति का योगदान नहीं माना जा सकता है और यह एक दिन की मेंहनत नहीं है।

JNU एक विश्वविद्यालय ही नही है, यह एक जज्बा है, यह एक परंपरा है, यह एक शान है, जो कभी भी एक झटके में खत्म नहीं हो सकता है। यह जैसे आपकी शान है हमारी भी शान है और हम भी गर्व से कहते है, JNU हमारे देश में है। लेकिन जो अभद्र भाषा का उपयोग किया गया देश के लिए क्या वह सही है।

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JNURow – खोखली बुद्धिमत्ता या अतिदेशभक्ति


ये कहाँ थे जब मालदा और पूर्णिया में लोकतंत्र का मखौल उड़ाया गया। तब इनकी बुद्धिजीविता विदेश भ्रमण को गयी थी। अगर सरकार और उसके खिलाफ कुछ बोलना है बोले आपको पूरा हक़ है लेकिन देश के टुकड़े हज़ार करके के आप क्या साबित करना चाहते है। सरकार के खिलाफ आपको बोलने में डर लगता है। हम बड़ी जल्दी भूल जाते है मुम्बई एक लड़के को कार्टून बनाने के चक्कर में देशद्रोह का मुकदमा लगाया गया था तब किसी ने नहीं बोला क्यों क्योंकी वह आम आदमी था। क्या मुझे यही नारे लगाने की आज़ादी मिलेगी सड़को पर शायद नही। मेरा सिर्फ एक ही कहना है अगर एक बात कहने की आज़ादी लेखक, बुद्धिजीवी, नेताओ, विद्यार्थियों को है तो आम आदमी को क्यों नहीं। मतलब साफ़ है सरकार कोई भी हो वह सिर्फ दमन कर सकती है आवाज़ों को जो आम जनता से उठती है क्यों क्योंकि वहाँ उसके सपोर्ट में कोई खड़ा नहीं होना चाहता है। मुझे तरस आता है अपने आप पर लोग जो लोग राजनीती भविस्य की आड़ में देश की जनता की भावनाओ से खिलवाड़ करते है। अपने हिसाब से चीजो को इन्टरप्रेट करता है। हर व्यक्ति को है आपको भी है मुझे भी है लेकिन देश के टुकड़े हज़ार होंगे, हमे चाहिए आज़ादी। कौन सी आज़ादी की बात कर रहे है। JNU में पढ़ने वाले 30-40% विद्यार्थी स्नातक के क्या किसी ने उन्हें देखा किसी प्रोटेस्ट नहीं क्योंकि यही बड़े भाई बनते है उनको बोलते है अपने रूम में जाओ तुम्हारा पढ़ने का टाइम है। 10 बजे के बाद कोई भी स्नातक का विद्यार्थी ढाबे पर नहीं दीखता है क्या यह आज़ादी है।

अगर आप इतने बुद्धिजीवी है तो थोड़ा बुद्धिजीविता का परिचय दीजिये और मुखर हो के बोले की JNU में यह देश विरोधी नारे लगे। आप ऐसा कैसे कह सकते है तथाकथित देश विरोधी नारे। शब्दों का हेर फेर मुझे भलीभाँति समझ आता है भले कुछ लोग ना समझ पाये।

तो मेरा सवाल साफ़ है की अगर देशद्रोह है तो देशद्रोह है इसमें किंतु और परंतु कहाँ से आता है। क्या एक आम आदमी यही नारे लगाएगा तब क्या आप यही कहेंगे। अगर कोई राजनेता, विद्यार्थी, लेखक पर देशद्रोह का आरोप नहीं लगेगा तो किस पर लगेगा, आम आदमी पर। क्या आम आदमी की यह औकात है की ऐसा वह बोल पाये। तो सोचना आपको और हमको है की इन चंद वोट के लुटेरो से देश को बचाना है या यु ही घूंट घूंट कर जीने देना है देश को जहाँ एक तरफ हमारे जवान सीमाओं की सुरक्षा के लिए जीते और मरते है दूसरी तरफ ये चंद लोग इस देश की सहिष्णुता और एकता को खंडित करने की कोशिश कर रहे है।

कोई नहीं आया एक आम आदमी ही था मुम्बई का असीम त्रिवेदी, अख़लाक़ का क्या हुआ आम आदमी ही था, मालदा में क्या हुआ आम आदमी ही थे, पूर्णिया में क्या हुआ आम आदमी ही थे। जनाब आम आदमी के साथ कोई खड़ा नहीं होता और ना होगा क्योंकी वह आम आदमी जो ठहरा। ये सिर्फ बुद्दिजीवियों के लिए है, लेखको के लिए है, ये सिर्फ राजनेताओ के लिए है, ये सिर्फ पत्रकारो के लिए है। आम आदमी के लिए कुछ नहीं है कोई नहीं लड़ता। एक आम आदमी ही है जिसने तमिलनाडु सरकार के खिलाफ एक लोकगीत गाया और जेल में है।

सोचना आपको है क्योंकि आप किसी ना किसी तरह से इन संस्थानों में आपकी गाढ़ी कमाई का पैसा जरूर जाता है। और आपकी कमाई के पैसो से हमारे देश के कुछ अच्छे दिमाग को चुना जाता है इन संस्थानों में पढाई के लिए चुना जाता है ताकि आगे चल कर यही दिमाग भविष्य को तैयार करने में सहायक हो।

बोलने की आज़ादी या राजनीती


ऐसा लगता है जैसे हमारे यहाँ बोलने की आज़ादी का मतलब होता है अगर आप सरकार में है विरोध सहना और विपक्ष में है तो सरकार को पानी पी पी के कोसना। वही हाल कुछ घटनाओ को लेकर भी राजनितिक पार्टियां ऐसे रियेक्ट करती है जैसे ऐसा पहले कभी हुआ ही नहीं। यहाँ पर राजनितिक पार्टियां किसी भी घटने को हमेशा अपने नफे नुक्सान के लिए देखती है चाहे उसमे जनता का कितना नुक्सान ही क्यों ना हुआ हो।

ऐसा लगता है अगर आप स्कॉलर हो तो भारत में आपको कुछ भी बोलने का अधिकार हो जाता है और आम आदमी को एक शब्द भी बोलना भारी परता है सिस्टम या न्यायालय के खिलाफ़। क्योंकि हाल के दिनों जगजाहिर स्कॉलर ने उच्चतम न्यायलय के फैसलो के विरुद्ध भी बाते कही है। क्या वे न्यायालय की अवमानना नहीं थी? मुझे नहीं लगता कोई आम आदमी ऐसी हिमाकत कर सकता है। क्या कोई उन्हें समझायेगा की अगर आपको बोलने की आज़ादी है तो इसका मतलब ये नहीं की आप देश के विरुद्ध बोलते रहे और देश को शर्मशार करते रहे।

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गणतंत्र दिवस


गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाये!

आज के दिन सभी एक दूसरे को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाये दे रहे है। आज की युवाओं की आदत है की आज सबको गणतंत्र दिवस की शुभकामना दी और अगले साल भर भूल जायेंगे। फेसबुक पर बड़ी बड़ी बाते करेंगे और अगले दिन सब कुछ भूल जायेंगे। और अगली गणतंत्र दिवस आने तक प्रशासन को जी भर के कोसना।

क्यों ना हम आज के दिन कुछ अपने ने प्रण करे की अगले एक साल तक प्रशासन को कोसने के बजाये हम अपने अकेले के तौर पर जो बदल सकते है बदले जैसे की:
हम महिलाओं का अपमान नहीं करेंगे।
हम अपने आस पास गन्दा नहीं फ़ैलाएँगे।
हम कानून का पालन करेंगे।
हम कूड़ा को कूड़ेदान में डालेंगे।
हम उनकी सहायता करेंगे जिन्हें उसकी जरुरत होगी।
हम दुर्घटना में घायल लोगो को नजदीक के अस्पताल में पहुंचाएंगे।
सड़क के नियमो का पालन करेंगे।

जय हिन्द जय भारत!

Bharat Ratna Pandit Bhimsen Gururaj Joshi


मेरे उम्र के सभी लोगो को याद होगा जब हमने अपनी लाइफ में पहली बार टीवी देखना शुरू किया तो तभी दूरदर्शन पर उस समय ‘मिले सुर मीरा तुम्हारा’ गाना जरुर बजता था और उसमे भारत रत्न पंडित भीमसेन गुरुराज जोशी की गाना सुन के कैसे चहक उठते थे की पंडित जी को ऊपर वाले ने क्या आवाज़ दी है! हम गर्व महसूस करते थे की पंडित जी जैसी आवाज़ हमारे भारत में ही पैदा हो सकती है! मेरी तरफ से आज उन लाखो हिन्दुस्तानियो की तरफ से भारत रत्न पंडितजी को भावभीनी शर्धांजलि! आशा करते है की भगवान् उनकी आत्मा को शांति प्रदान करेगे! और हर भारत वासी उनकी कला जगत में किये गए अतुलनीय सहयोग को हमेशा याद रखेगा!

पंडितजी कला जगत में हमेशा स्वर भास्कर के नाम से बुलाये जाते रहे! पंडितजी, जो स्वर सम्राट थे कला जगत के, और आज हमेशा के लिए शांत हो गए! पंडितजी हिन्दुस्तानी पारंपरिक कला जगत के उत्तम गायकों में से एक गिने जाते थे और उनका नाम हमेशा ही कला जगत में बहुत ही सम्मान के साथ लिया जाता है! तभी उनके इस योगदान को देखते हुआ भारत सरकार ने उन्हें भारत की सबसे बरी नागरिक सम्मान (भारत रत्न) से २००८ सम्मानित में सम्मानित किया था! किराना घराना से ताल्लुक रखने वाले पंडितजी को हमेशा उनके ख्याल गायकी के साथ-साथ भजन और अभंग के बेहतरीन गायकी के लिए भी जाने जायेंगे!

भारत रत्न पंडित भीमसेन जोशीजी को एक बार फिर से मेरी तरफ से भावभीनी शर्धांजलि!