छठ महापर्व या प्रकृति का सम्मान


wp-1478252870556.pngछठ महापर्व सिर्फ लोक आस्था का पर्व नहीं है यह एक ऐसा पर्व है जो प्रकृति में आस्था को जागृत करता है और मनुष्य का प्रकृति के प्रति आगाध प्रेम को दर्शाता है। मैं तो इससे ज्यादा ऊपर जाकर यह कहूंगा कि यह एक मात्र हिन्दू पर्व है जिसमे किसी भी तरह की प्राकृतिक क्षति को व्यवहार में नहीं लाकर प्रकृति के प्रेम को दर्शाया जाता है जो किसी और हिन्दू पर्व में नहीं है।

छठ महापर्व में डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर अपनी आस्था और और अपने विश्वास के साथ साथ लोग अपनी कृतज्ञता दर्शाते है जो किसी और पर्व में नहीं। सूर्य को अर्घ्य तो हिन्दू लोग रोज़ देते है लेकिन छठ महापर्व की खासियत यह है कि आपको नदी या तालाब में जाकर सूर्य को अर्घ्य देना होता है। अगर आप नजदीक से छठ पूजा में उपयोग होने वाले प्रसाद के रूप में या किसी भी तरह उपयोग होने वाले सामानों का प्रकृति से गहरा नाता होता है जो यह साबित करता है कि इस पर्व को मनाने वाले व्रतियों का प्रकृति के प्रति सम्मान दर्शाता है।

हम जो वाकई में प्रकृति का सम्मान करना भूल गए है यह महापर्व हमें उसके प्रति जागरूक करता है चाहे वह सामाजिक साफ सफाई की बात हो या लोगो का आपस में घाटो पर विचारो का आदान प्रदान जिसकी हमें आज के आधुनिक और डिजिटल युग में बहुत ही जरुरत है उससे रूबरू करवाता है।

आशा करते है हम जितना सम्मान इस पर्व के दौरान लोगो के साथ साथ प्रकृति का करते है उतना ही सम्मान महापर्व के ख़त्म होने के बाद भी करेंगे। यह हमारे लिए सालों भर एक प्रकार होना चाहिए तभी वाकई में सूर्य या प्रकृति के प्रति हमारी सच्ची अर्घ्य होगी।

आप सभी को एक बार फिर से छठ महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं और आशा करते है यह महापर्व आपके और आपके पूरे परिवार को मानसिक शांति के साथ साथ आने साल में सुख और समृद्धि प्रदान करे।

असली स्वतंत्रता या नकली स्वतंत्रता


Happy Independence Day
Happy Independence Day

आज 15 अगस्त को हर कोई सोशल मीडिया पर अपनी अपनी देशभक्ति प्रदर्शित करने में लगा हुआ है अपने अपने तरीके से। हर किसी के प्रोफाइल को देखकर ऐसा लगता है जैसे अगर आज अँगरेज़ होते तो सोशल मीडिया के वीर उन्हें कुछ ही मिनटों में निकाल बाहर फेंकते।

क्या वाक़ई में यही स्वतंत्रता है?

हमे वाक़ई में स्वतंत्रता चाहिए तो हमें अपने अंदर कुछ बदलावों को तवज्जो देनी चाहिए ताकि हम बदल सके और अपने समाज के अंदर बदलाव ला सके और मेरे ख्याल से वाक़ई में वही स्वतंत्रता होगी। तो अब सवाल उठता है ऐसे कौन से बदलाव लाये जाये अपने अंदर ताकि हमें सच्ची स्वतंत्रता मिल सके।

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गणतंत्र दिवस


गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाये!

आज के दिन सभी एक दूसरे को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाये दे रहे है। आज की युवाओं की आदत है की आज सबको गणतंत्र दिवस की शुभकामना दी और अगले साल भर भूल जायेंगे। फेसबुक पर बड़ी बड़ी बाते करेंगे और अगले दिन सब कुछ भूल जायेंगे। और अगली गणतंत्र दिवस आने तक प्रशासन को जी भर के कोसना।

क्यों ना हम आज के दिन कुछ अपने ने प्रण करे की अगले एक साल तक प्रशासन को कोसने के बजाये हम अपने अकेले के तौर पर जो बदल सकते है बदले जैसे की:
हम महिलाओं का अपमान नहीं करेंगे।
हम अपने आस पास गन्दा नहीं फ़ैलाएँगे।
हम कानून का पालन करेंगे।
हम कूड़ा को कूड़ेदान में डालेंगे।
हम उनकी सहायता करेंगे जिन्हें उसकी जरुरत होगी।
हम दुर्घटना में घायल लोगो को नजदीक के अस्पताल में पहुंचाएंगे।
सड़क के नियमो का पालन करेंगे।

जय हिन्द जय भारत!

नया साल मुबारक 2016


happy-new-year-2016आने वाला समय नए साल का स्वागत और पुराने साल की अच्छे से विदाई कहने का वक़्त है। यह समय है पुराने समय की अच्छी बातो को याद करके उसके सहारे आगे बढ़ने की और बुरे समय को भूलने। यह समय है जीवन में कुछ नयी शुरुआत करने का। नया साल हमेशा सबके लिए कुछ ना कुछ सन्देश ले के आता है। हम सबको इस बात को समझना चाहिए जो कुछ भी गलत हुआ पिछले साल में उसके पीछे कोई ना कोई वजह रही होगी और उन गलत बातों को भूल के आगे बढ़ना चाहिए।

नए साल की शुरुआत लोगो को नए साल की मुबारकवाद से करे। साल २०१५, साल २०१६ के लिए बाहें फैलाएं खड़ा है और हमसे कह रहा है उठो, जागो, देखो और सीखो पिछले साल की गयी गलतियों से और नए साल का स्वागत करो नयी खुशियों और उम्मीदों से।

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Happy Teacher’s Day


The great philosopher, Dr S. Radhakrishnan said that a university is what its teachers make it. In the ancient universities in India, the teachers or professors as they are called today were treated with great respect though, unlike at present, they did not get good pay and perks.

Teacher’s Day in India is celebrated every year on 5th September, ever since 1962. The day commemorates the birthday of Dr Sarvepalli Radhakhrishnan, a philosopher and a teacher par excellence, and also the first Vice President of India and the second President of India. Some students approached him to celebrate his birthday and he asked them to honor their teachers instead. Dr Radhakhrishnan believed that “teachers should be the best minds in the country”. Whether that is true or not in modern India is a contentious issue. Every day millions of parents hand over their children to teachers to mould and shape as they see fit. The authority and power invested in the teacher is immense. Do they measure up to that responsibility? Does the system encourage for the “best minds in the country” to enter the profession of teaching? These are difficult questions with no clear answers. But what is clear is the role of the teacher and the potential in that responsibility. And who can articulate that better than a life long teacher?

I congratulate all my teachers who shaped me from childhood on the occasion of Teacher’s Day. I respect each and every one who contributed in my life from all aspects. Happy Teacher’s Day to all teachers in world and hope they will give their best result to make the society more civilized.