सोशल मीडिया का मकरजाल


जिंदगी कितनी खुबसूरत होती है, जब आप किसी राजनैतिक पार्टी की ना तो तरफदारी करते है, ना ही विरोध करते है। खासकर तब जब आप ना तो कोई टीवी डिबेट देखते है और ना ही सोशल मीडिया पर दोस्तों का टाइमलाइन देखते है। और तो और किसी भी पेपर को पढने के बाद उसकी किसी बात को दिल पे ना लेते हुए उसको एक जानकारी का साधन समझते हुए पढ़ जाते है। किसी नेता को फॉलो करने के बाद भी उसके किसी बात पर कोई टिपण्णी नहीं करते है तो वाकई में लगता है जिंदगी कितनी खुबसूरत है। अपने में मग्न, क्या करना है और क्यों करना है ऐसी बातो पर बहस। जब ना तो सरकारे बदलती है ना सरकारों के काम करने का तरिका तो क्यों ना चुपचाप अपनी जिंदगी को बेहतर तरीके से जीने की कोशिश की जाए। Continue reading “सोशल मीडिया का मकरजाल”

बिहिया कांड और हमारी मानसिकता


बिहिया कांड और हमारी मानसिकताबिहार के बिहिया में हुई घटना पुरे समाज को शर्मसार करने वाली है लेकिन शायद हमें कोई फर्क पड़ता हो क्योंकि वहां ना तो हमारा कोई रिश्तेदार है ना ही यह घटना हमारे किसी जानने वाले के साथ हुई है तो बेकार में अपना खून क्यों जलाना। कब हम ऐसी घटनाओं पर कुछ नहीं कर सकते है तो कम से कम अपनी प्रतिक्रिया तो देना शुरू करे। क्या ऐसी घटनाओं का भी किसी राजनैतिक पार्टियों से लेना देना होता है या किसी एक पर इसका ठीकरा फोड़कर आगे बढ़ा जा सकता है शायद नहीं। चाहे किसी भी पार्टी की सरकार हो या किसी भी पार्टी से ताल्लुक रखने वाले नेता हो हम आम आदमीं है इसके बारे में बिना किसी पार्टी से पक्षपात किये हम ऐसी घटनाओं की भर्त्सना कर सकते है। Continue reading “बिहिया कांड और हमारी मानसिकता”

अटल बिहारी वाजपेयी को अश्रुपूरित श्रधांजली


भारत रत्न माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी जिन्होंने १६ अगस्त २०१८ को अपनी अंतिम सांस ली। जो एक प्रखर वक्ता, एक कवि, एक सुलझे हुए व्यक्ति, संवेदनशीलता का जीता जागता समुन्द्र जो हर दिल अजीज थे। आज यानी १७ अगस्त २०१८ को पंचतत्व में विलीन हो गए। पंचतत्व में विलीन तो उनका दैहिक शरीर हुआ है लेकिन उनकी वाणी, उनकी पंक्तिया, उनका जीवन सन्देश हम सबके बीच है और हमेशा रहेंगी। ब्रजभाषा और खड़ी बोली में काव्य रचना करने वाले अटल बिहारी वाजपेयी जी की कविताएँ जितनी जीवंत लगती है उतनी ही जिंदगी से जुड़ी हुई भी लगती है। इसी का जीता जागता उदहारण है कविता “गीत नया गाता हूं” जिसकी पंक्तियाँ “हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा, काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूं” जन जन को याद है। Continue reading “अटल बिहारी वाजपेयी को अश्रुपूरित श्रधांजली”

हम कितने स्वतंत्र है?


15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस की आप सभी को बधाई।

आज स्वतंत्रता दिवस है सोचनीय है किस हद तक हम आजाद है।
हमारे ख्याल कितने आजाद है?
हम आर्थिक रूप से कितने आजाद है?
हमारी सीमाएं कितनी आजाद है?
हम भीड़ तंत्र से कितने आजाद है?
हम महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर कितने आजाद है?
हम दहेज उत्पीड़न से कितने आजाद है? Continue reading “हम कितने स्वतंत्र है?”

समाज में होने वाले दुष्कृत्य का जिम्मेदार कौन?


बिहार में एक तेरह साल की बच्ची के साथ कुछ अल्पवयस्क लड़कों ने सड़क पर जो घिनौना दृश्य प्रस्तुत किया वह कही से भी एक सभ्य समाज के लिए सही नहीं कहा जा सकता है तो इसका क्या मतलब हम समाज को भेड़ियो का समाज या सांपो का समाज या जानवरों का समाज कहना शुरू कर दे। शायद नहीं क्योंकि अगर किसी समाज में एक मुठ्ठी भर ऐसे असामाजिक दुस्चरित्र वाले लोग रहते हो तो समाज को सोचना पड़ेगा। क्या ऐसी छेड़छाड़ की घटनाए सिर्फ लड़कियों के साथ होती है शायद नहीं क्योंकि एक रिपोर्ट के अनुसार जितनी संख्या में लड़कियां ऐसी घटनाओ की शिकार होती है उससे कही ज्यादा अल्पवयस्क बच्चे ऐसी यौनउत्पीडन के शिकार होते है इसी वजह से सरकार ने POCSO Act 2012 में बदलाव किया है जिसमे यौन उत्पीड़न के मामलो में अब लड़कियों के साथ लडको को भी शामिल किया है। Continue reading “समाज में होने वाले दुष्कृत्य का जिम्मेदार कौन?”