बिहार में जातिगत राजनीति और उसका दुष्परिणाम


जब आप बिहार से होते है और आप उस दौर में विद्यालय जाते है जब बिहार की धरती अपने विद्यालयों के लिए सबसे बुरे दौर से गुजर रहा हो। जिनको लोग गरीबो का मसीहा कहते नही थकते है यहाँ तक कि एक तथाकथित जिसको हाल के कुछ वर्षों में मीडिया ने बिहार का मसीहा या आने वाला कल घोषित किया हुआ है उनके पैरों पर गिर पड़े सार्वजनिक तौर पर। जिनको बिहार में घोटालो का मसीहा कहा जाता है। लेकिन जैसा मैंने पहले भी कहा है आजकल वे चुनावी मैदान में है तो प्रचार के दौरान वे सिर्फ व्यक्तिगत लांक्षण लगा रहे कोई ऐसी बात नही बता रहे जिससे यह पता लगे कि भारत के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में से एक पूर्व छात्र नेता और पीएचडी धारक होने के नाते उनके पास कुछ ऐसी योजना है जिससे अपने समाज का पिछड़ापन दूर हो। Continue reading “बिहार में जातिगत राजनीति और उसका दुष्परिणाम”

व्यक्ति का समाज के प्रति दायित्व


व्यक्ति का समाज के प्रति वही दायित्व है जो अंगों का सम्पूर्ण शरीर के प्रति। यदि शरीर के विविध अंग किसी प्रकार स्वार्थी अथवा आत्मास्तित्व तक ही सीमित हो जायें तो निश्चय ही सारे शरीर के लिए एक खतरा पैदा हो जाए। सबसे पहले भोजन मुँह में आता है। यदि मुँह स्वार्थी बन कर उस भोजन को अपने तक ही सीमित रख कर उसका स्वाद लेता रहे और जब इच्छा हो उसे थूक कर फेंक दे, तो उसके इस स्वार्थ का परिणाम बड़ा भयंकर होगा। जब मुँह का चबाया हुआ भोजन पेट को न जाएगा तो कहाँ से उसका रस बनेगा और कहाँ से रक्त माँस, मज्जा आदि? इस क्रिया के बन्द हो जाने पर शरीर के दूसरे अंगों और अवयवों को तत्व मिलना बन्द हो जाएगा। वे क्षीण और निर्बल होने लगेंगे और धीरे-धीरे पूरी तरह अस्वस्थ होकर सदा-सर्वदा के लिए निर्जीव हो जायेंगे। पूरा शरीर टूट जाएगा और शीघ्र ही जीवन हीन होकर मिट्टी में मिल जाएगा। यह सब अनर्थ, एक मुँह के स्वार्थ-परायण हो जाने से घटित होगा। Continue reading “व्यक्ति का समाज के प्रति दायित्व”

पुलवामा हमले के बाद भारत को क्या करना चाहिए?


पुलवामा हमले के बाद भारत को क्या करना चाहिए?

पुलवामा हमले में हुई क्षति के लिए हमारी संवेदना उन परिवारों के साथ है जिन्होंने अपनो को खोया है। कोई भी शब्द इसकी भरपाई नही कर सकता है।

पुलवामा हमले में भारतीय जवानों के ऊपर हुई कार्यवाही को कायराना माना जायेगा। देश मे उपजे आक्रोश को देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल नही की लोगो को एकमात्र उपाय आर या पार ही दिख रहा है। क्या यही एक उपाय है मेरे ख्याल से शायद नही? क्योंकि इसके अलावा और भी कदम है जिसको भारत सरकार उठा सकती है जिससे सरहद पार देश को सोचना पड़ेगा। मैं निम्नलिखित बातों पर अमल करने के केंद्र सरकार से अपेक्षा करता हूँ:-
१) MFN का दर्जा समाप्त (कर दिया गया)।
२) भारतीय राजदूत को ना कि सिर्फ बुलाया जाय बल्कि भारतीय उच्चायोग को तब तक बंद कर देना चाहिए जबतक पाकिस्तान की तरफ आगे कोई हमला नही होने का संयुक्त राष्ट्र में लिखित आश्वासन ना मिल जाय।
३) रेल सेवा के साथ साथ बस सेवा को भी बंद कर देना चाहिए।
४) भारत का हवाई क्षेत्र को पाकिस्तान से उड़ने वाले या पाकिस्तान को जाने वाले सभी हवाई उपयोग के लिए प्रतिबंधित कर देना चाहिए।  Continue reading “पुलवामा हमले के बाद भारत को क्या करना चाहिए?”

सोशल मीडिया का मकरजाल


जिंदगी कितनी खुबसूरत होती है, जब आप किसी राजनैतिक पार्टी की ना तो तरफदारी करते है, ना ही विरोध करते है। खासकर तब जब आप ना तो कोई टीवी डिबेट देखते है और ना ही सोशल मीडिया पर दोस्तों का टाइमलाइन देखते है। और तो और किसी भी पेपर को पढने के बाद उसकी किसी बात को दिल पे ना लेते हुए उसको एक जानकारी का साधन समझते हुए पढ़ जाते है। किसी नेता को फॉलो करने के बाद भी उसके किसी बात पर कोई टिपण्णी नहीं करते है तो वाकई में लगता है जिंदगी कितनी खुबसूरत है। अपने में मग्न, क्या करना है और क्यों करना है ऐसी बातो पर बहस। जब ना तो सरकारे बदलती है ना सरकारों के काम करने का तरिका तो क्यों ना चुपचाप अपनी जिंदगी को बेहतर तरीके से जीने की कोशिश की जाए। Continue reading “सोशल मीडिया का मकरजाल”

बिहिया कांड और हमारी मानसिकता


बिहिया कांड और हमारी मानसिकताबिहार के बिहिया में हुई घटना पुरे समाज को शर्मसार करने वाली है लेकिन शायद हमें कोई फर्क पड़ता हो क्योंकि वहां ना तो हमारा कोई रिश्तेदार है ना ही यह घटना हमारे किसी जानने वाले के साथ हुई है तो बेकार में अपना खून क्यों जलाना। कब हम ऐसी घटनाओं पर कुछ नहीं कर सकते है तो कम से कम अपनी प्रतिक्रिया तो देना शुरू करे। क्या ऐसी घटनाओं का भी किसी राजनैतिक पार्टियों से लेना देना होता है या किसी एक पर इसका ठीकरा फोड़कर आगे बढ़ा जा सकता है शायद नहीं। चाहे किसी भी पार्टी की सरकार हो या किसी भी पार्टी से ताल्लुक रखने वाले नेता हो हम आम आदमीं है इसके बारे में बिना किसी पार्टी से पक्षपात किये हम ऐसी घटनाओं की भर्त्सना कर सकते है। Continue reading “बिहिया कांड और हमारी मानसिकता”